पुराने मोबाइल के बदले बर्तन लेना पड़ेगा भारी, खुला अंतरराष्ट्रीय मदरबोर्ड स्कैम

गली के ‘बर्तन वाले’ से लेकर चीन-बांग्लादेश के हैकर्स तक… Https कैसे आपके टूटे हुए मोबाइल का ‘दिमाग’ बेचकर करोड़ों कमा रहा है यह गिरोह

जनता तो पूछेगी, भगवत कौशिक। कटिहार/नई दिल्ली : अगर आप भी घर में पड़े पुराने, टूटे या बेकार स्मार्टफोन को किसी फेरीवाले को चंद स्टील के बर्तनों या प्लास्टिक के डिब्बों के बदले दे देते हैं, तो रुक जाइए! आपकी यह मामूली सी लापरवाही आपको उम्र भर का दर्द दे सकती है। उत्तर प्रदेश और बिहार पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक ऐसे ‘मदरबोर्ड स्कैम’ (Motherboard Scam) का पर्दाफाश हुआ है, जिसके तार चीन, बांग्लादेश और कंबोडिया के खतरनाक साइबर अपराधियों से जुड़े हैं।

11,000 मोबाइल और 1 करोड़ का माल: ऐसे हुआ खुलासा

​इस सनसनीखेज खेल का अंत तब शुरू हुआ जब यूपी के मिर्जापुर (लालगंज) में पुलिस ने एक ट्रक को रोका। ट्रक में भूसे की तरह 11,605 पुराने मोबाइल फोन भरे हुए थे। पकड़े गए 8 आरोपियों ने जब मुँह खोला, तो बिहार के कटिहार का रहने वाला इस्तार आलम पुलिस के राडार पर आया। बिहार STF और यूपी पुलिस ने छापेमारी कर जब इस्तार को दबोचा, तो जो सच सामने आया उसने सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए।

फेरीवाला नहीं, डेटा का ‘शिकारी’ है गिरोह

​इस्तार आलम का नेटवर्क बिहार, झारखंड से लेकर दिल्ली और तमिलनाडु तक फैला था। उसने हजारों ‘फेरीवालों’ को काम पर रखा था। ये फेरीवाले कबाड़ी बनकर गलियों में घूमते हैं और खासकर महिलाओं को नए बर्तनों का लालच देकर उनके पुराने फोन बटोर लेते हैं।

खतरा क्या है? लोग सोचते हैं कि फोन तो बंद है या टूटा है, तो क्या फर्क पड़ता है? लेकिन असली खेल फोन के भीतर लगे ‘मदरबोर्ड’ का है। इस्तार इन फोनों को तोड़कर उनका मदरबोर्ड निकालता था। यह चिप ही फोन का ‘दिमाग’ होती है, जिसमें आपका:

  • ​डिलीट किया हुआ फोटो और वीडियो
  • ​बैंकिंग पासवर्ड और ओटीपी हिस्ट्री
  • ​कॉन्टैक्ट्स और निजी दस्तावेज सुरक्षित रहते हैं।

चीन और बांग्लादेश के हैकर्स को ‘सप्लाई’

​इस्तार इन मदरबोर्ड्स को चीन और बांग्लादेश के उन गिरोहों को बेचता था, जो कंबोडिया और म्यांमार में बैठकर ‘साइबर स्कैम कंपाउंड’ चलाते हैं। ये हैकर्स आधुनिक मशीनों से आपके पुराने मदरबोर्ड से डेटा रिकवर कर लेते हैं। यही डेटा बाद में ब्लैकमेलिंग, बैंक फ्रॉड और पहचान की चोरी (Identity Theft) के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इतना ही नहीं, यह गिरोह जामताड़ा के ठगों को भी यह ‘कच्चा माल’ सप्लाई करता था।

दिहाड़ी मजदूर के खाते में 45 लाख का खेल

​यह गिरोह कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस्तार के यहाँ काम करने वाला एक तथाकथित ‘दिहाड़ी मजदूर’, जो खुद को गरीब बताता था, उसके बैंक खाते में पिछले दो साल में 45 लाख रुपए का लेनदेन पाया गया। यह करोड़ों का काला कारोबार कबाड़ की आड़ में फल-फूल रहा था।

एक्सपर्ट एडवाइज: अपना पुराना फोन कभी भी किसी अनजान फेरीवाले को न दें। अगर फोन बेकार हो चुका है, तो उसे अधिकृत ई-वेस्ट (E-waste) सेंटर पर ही दें या उसे नष्ट करने से पहले उसके मदरबोर्ड को पूरी तरह फिजिकली डैमेज कर दें। आपकी एक छोटी सी बचत, साइबर अपराधियों की बड़ी तिजोरी भर सकती है।

Motherboard Scam, Cyber Crime India, Istar Alam Katihar, UP Police, Bihar STF, Data Theft, China Cyber Hackers, Jamtara Scam, Mobile Scrap Business

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!