हरियाणा के सरकारी स्कूलों ने आज वैश्विक शिक्षा के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कर लिया है। ‘South-South Learning Symposium’ के तहत दुनिया के 8 देशों के शीर्ष शिक्षा विशेषज्ञों और UNESCO, World Bank जैसी संस्थाओं के प्रतिनिधिमंडल ने हरियाणा के स्कूलों का दौरा किया। जिस ‘हरियाणा मॉडल’ की चर्चा कभी केवल फाइलों में होती थी, आज उसकी गूँज Oxford University तक पहुँच चुकी है।
🌍 अंतरराष्ट्रीय कुंभ: एक छत के नीचे दुनिया के दिग्गज
गुरुग्राम, रोहतक, झज्जर और सोनीपत के स्कूलों में आज एक ‘शिक्षा का महाकुंभ’ देखने को मिला। इस दल में दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, रवांडा, घाना, केन्या, तंजानिया, नेपाल और यूनाइटेड किंगडम के नीति निर्माता शामिल थे। इनका एकमात्र उद्देश्य था—हरियाणा के उस ‘जादू’ को समझना, जिसने प्राथमिक शिक्षा को पूरी तरह डिजिटल और परिणाम-आधारित बना दिया है।
💻 डिजिटल हरियाणा: 4 ‘ब्रह्मास्त्र’ ऐप्स ने खींचा ध्यान
विदेशी विशेषज्ञों ने माना कि हरियाणा की तकनीक विकसित देशों के लिए भी एक बड़ी सीख है। मिशन की सफलता इन 4 स्तंभों पर टिकी है:
निपुण मेंटर ऐप: क्लासरूम से लाइव असेसमेंट और पलक झपकते ही राज्य स्तरीय डैशबोर्ड पर डेटा।
निपुण टीचर ऐप: शिक्षकों के हाथ में डिजिटल टूलकिट, जिसने पढ़ाई को ‘बोझ’ से ‘मस्ती’ में बदल दिया।
निपुण पैरेंट्स ऐप: ग्रामीण इलाकों के माता-पिता भी अब मोबाइल पर देख रहे हैं अपने बच्चे की ‘लाइव प्रोग्रेस’।
CRP (क्लस्टर रिसोर्स पर्सन): जमीनी स्तर पर मैनेजमेंट का ऐसा सटीक ढांचा दुनिया में कहीं और नहीं।
🎤 ग्राउंड जीरो से: “यह योजना नहीं, बच्चों के भविष्य का संकल्प है”
गुरूग्राम में निपुण मिशन के सारथी और जिला कोऑर्डिनेटर मनोज कुमार लाकड़ा ने डेलिगेट्स को मिशन की बारीकियों से रूबरू करवाया। उनके अनुभव के दो सबसे दमदार पहलू चर्चा का विषय रहे:
मनोज कुमार लाकड़ा ने कहा: “हमने तकनीक और मानवीय संवेदना के बीच ऐसा पुल बनाया है, जहाँ हर बच्चे की सीखने की गति पर हमारी नज़र है। अब हम अनुमानों पर नहीं, बल्कि ‘मेंटर ऐप’ के सटीक आंकड़ों पर निर्णय लेते हैं। यदि किसी दूरदराज के स्कूल में गणित का ग्राफ गिरता है, तो हमें हेड ऑफिस में तुरंत पता चल जाता है और हम वहीं हस्तक्षेप (Intervention) करते हैं।”
🏫 क्लासरूम का कायाकल्प: कन्हई से खरावड़ तक गूँजी तारीफ
प्रतिनिधिमंडल ने गुरुग्राम के कन्हई (सेक्टर-44), रोहतक के खरावड़, झज्जर के बालौर और सोनीपत के कबीरपुर स्कूलों का दौरा किया। यहाँ दीवारों पर बने ‘प्रिंट रिच एनवायरनमेंट’ और लकड़ी के खिलौनों वाले TLM (टीचिंग लर्निंग मैटेरियल) को देखकर विदेशी मेहमानों ने कहा— “हरियाणा ने दुनिया को शिक्षा का नया रास्ता दिखा दिया है।”
📊 हरियाणा: नंबर 1 होने का प्रमाण (डेटा 2026)
मुख्य बिंदु
शानदार उपलब्धि
शिक्षक प्रशिक्षण
35,000+ प्राथमिक शिक्षक FLN एक्सपर्ट
डिजिटल कवरेज
8,600+ स्कूलों की ऐप आधारित मॉनिटरिंग
छात्र सहभागिता
8 लाख+ बच्चों का लाइव डिजिटल रिकॉर्ड
लर्निंग आउटकम
पिछले 2 वर्षों में 22% की ऐतिहासिक वृद्धि
📋 इस ऐतिहासिक दौरे के प्रमुख साक्षी (VIP पैनल)
इस अंतरराष्ट्रीय दौरे में शिक्षा जगत के ये बड़े नाम शामिल रहे:
केन्या: सुश्री डेबोरा किमथी और फ्रेडरिक ओब्वोयेरे मुजुम्बा
UK: सुश्री डेवेलिन थॉम्पसन (FCDO)
NCERT: डॉ. संध्या (अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग)
हरियाणा टीम: रूपला सक्सेना (SPIU), मनोज कुमार लाकड़ा (नोडल अधिकारी, गुरूग्राम), स्नेहा बिष्ट (SPIU), राजीव ढुल (ब्लॉक कोऑर्डिनेटर) और उर्वशी (ABRC)।
निष्कर्ष: हरियाणा अब केवल ‘दूध-दही’ का प्रदेश नहीं, बल्कि ‘वैश्विक शिक्षा का पावरहाउस’ बन चुका है। डेलिगेट्स ने जाते-जाते एक ही बात कही— “सीखना है, तो हरियाणा के सरकारी स्कूलों से सीखो!”