जनता तो पूछेगी , भगवत कौशिक। भिवानी : हरियाणा में हुए राज्यसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। अंततः दो सीटों पर हुए इस चुनाव में कांग्रेस और भाजपा ने एक-एक सीट जीत ली।
हालांकि इस चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा कांग्रेस के पांच विधायकों की क्रॉस वोटिंग और बेहद कम अंतर से हुई जीत को लेकर रही। कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को मात्र 0.66 वोट के अंतर से हराकर सीट अपने नाम कर ली।
मतदान का पूरा गणित
राज्यसभा चुनाव में कुल 90 विधायकों को वोट डालना था, लेकिन इनेलो के 2 विधायकों ने वोट नहीं डाला।5 वोट रद्द हो गए।इस तरह 83 वैध वोट ही गिने गए।
भाजपा का गणित
भाजपा के 48 विधायक थे
इनमें से 1 वोट रद्द हो गया
यानी भाजपा के 47 वैध वोट रहे
पहली प्राथमिकता के वोट
भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया को: 39 वोट
निर्दलीय सतीश नांदल को: 8 वोट
कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग से बदला समीकरण
कांग्रेस के 37 विधायक थे, लेकिन 4 वोट रद्द हो गए। 5 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी।इससे कांग्रेस के पास पहली प्राथमिकता के 28 वोट ही बचे।यही वोट अंत में कर्मवीर बौद्ध की जीत का आधार बने।
दूसरी प्राथमिकता के वोट से हुआ फैसला
भाजपा समर्थित निर्दलीय सतीश नांदल को कुल
भाजपा के 8 वोट
कांग्रेस के 5 वोट (क्रॉस वोटिंग)
निर्दलीय के 3 वोट
यानी पहली प्राथमिकता के 16 वोट मिले।
चुनाव के फॉर्मूले के अनुसार:
भाजपा के संजय भाटिया की जीत के लिए जरूरी कोटा 27.66 वोट रहा।उनके पास पहली प्राथमिकता में 39 वोट थे।इसलिए 11.34 अतिरिक्त वोट दूसरी प्राथमिकता में ट्रांसफर हुए।
इन वोटों के बाद
सतीश नांदल: 27.34 वोट
कर्मवीर बौद्ध: 28 वोट
इस तरह बौद्ध 0.66 वोट से जीत गए।
चुनाव के राजनीतिक मायने
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह चुनाव कई कारणों से अहम है:
कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का खुला संकेत
भाजपा का निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन
बेहद कम अंतर से हुआ फैसला
विधानसभा की अंदरूनी राजनीति उजागर
इस नतीजे से हरियाणा की राजनीति में आने वाले समय में दल बदल और गुटबाजी की चर्चा और तेज होने की संभावना है।
