भिवानी में मानवता: जांबाज कर्मचारियों ने रक्तदान कर बचाई दो मरीजों की जान

जनता तो पूछेगी, भगवत कौशिक।भिवानी : शहर के दो अलग-अलग अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे मरीजों के लिए सरकारी विभागों के कर्मचारी ‘देवदूत’ बनकर सामने आए हैं। आपात स्थिति में समय पर रक्तदान कर इन जांबाजों ने न केवल मानवता का फर्ज निभाया, बल्कि समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण भी पेश किया। इस नेक कार्य के लिए शतकवीर रक्तदाता राजेश डुडेजा ने रक्तदाताओं को सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाया।

दुर्लभ ‘ओ नेगेटिव’ रक्त के लिए मची थी अफरा-तफरी

मामला कितलाना गांव निवासी एक मरीज से जुड़ा है, जो भिवानी के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। मरीज की हालत तब नाजुक हो गई जब डॉक्टरों ने तत्काल ओ नेगेटिव (O-) रक्त की आवश्यकता बताई। दुर्लभ ब्लड ग्रुप होने के कारण परिजनों को कहीं भी रक्त नहीं मिल रहा था। हताशा में उन्होंने शतकवीर राजेश डुडेजा से संपर्क किया।डुडेजा ने तुरंत यह सूचना पब्लिक हेल्थ विभाग के कनिष्ठ अभियंता (JE) कपिल शेयोरान को दी। कपिल ने बिना एक पल की देरी किए अस्पताल पहुंचकर रक्तदान किया और मरीज की जान बचाई।

फायर विभाग के जवानों ने भी दिखाया जज्बा

इसी तरह एक अन्य गंभीर मामले में रक्त की भारी कमी की सूचना मिलने पर फायर विभाग से अजय कुमार और उमेश राठी तुरंत सक्रिय हुए। इन दोनों जवानों ने अस्पताल पहुंचकर रक्तदान किया। इन जांबाजों की तत्परता ने दो अलग-अलग परिवारों को उजड़ने से बचा लिया।”वर्दी और पद से पहले हम एक इंसान हैं”रक्तदान के बाद जेई कपिल शेयोरान और फायर विभाग के कर्मचारियों ने एक साझा संदेश में कहा, “जब हमें पता चला कि मरीज की जान जोखिम में है और रक्त समूह दुर्लभ है, तो हमने इसे अपना सबसे पहला कर्तव्य समझा। हमें खुशी है कि हमारा एक छोटा सा प्रयास किसी के घर का चिराग बुझने से बचा सका।

रक्तदान है महादान : राजेश डुडेजा

शतकवीर रक्तदाता राजेश डुडेजा ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि एक यूनिट रक्त तीन जिंदगियां बचा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर कपिल, अजय और उमेश जैसे मददगार सामने न आते, तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। उन्होंने इन कर्मचारियों की कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भाव की जमकर प्रशंसा की।इस अवसर पर लैब टेक्नीशियन केशव, सतीश कुमार और अक्षय सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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