जनता तो पूछेगी ,भगवत कौशिक।नई दिल्ली : देश की राजनीति में अक्सर सांसदों के वेतन और सुविधाओं को लेकर चर्चा होती रहती है, लेकिन हाल ही में सूचना के अधिकार (RTI) से सामने आई जानकारी ने एक अलग तस्वीर पेश की है। लोकसभा सचिवालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वर्तमान लोकसभा में केवल दो सांसद ऐसे हैं जिन्होंने सांसद के रूप में मिलने वाला वेतन लेने से इनकार कर दिया है। ये दोनों सांसद अलग-अलग राजनीतिक दलों से हैं—एक भारतीय जनता पार्टी से और दूसरा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से।
1. नवीन जिंदल (कुरुक्षेत्र, हरियाणा) : हरियाणा के कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र से सांसद नवीन जिंदल ने सांसद के रूप में मिलने वाला वेतन ही नहीं बल्कि सभी सरकारी भत्ते और सुविधाएं भी लेने से इंकार कर दिया है। RTI के अनुसार वे मौजूदा लोकसभा में ऐसे एकमात्र सांसद हैं जिन्होंने वेतन, भत्ता और आधिकारिक सुविधाएं पूरी तरह छोड़ दी हैं।
घोषित संपत्ति: लगभग ₹1241 करोड़
राजनीतिक दल: भारतीय जनता पार्टी
विशेष तथ्य: सांसद वेतन, भत्ते और सरकारी सुविधाएं नहीं लेते
नवीन जिंदल देश के प्रमुख उद्योगपतियों में गिने जाते हैं और वर्तमान लोकसभा के सबसे अमीर सांसदों में शामिल हैं।
2. बिमोल अकोइजाम (इनर मणिपुर) : मणिपुर के इनर मणिपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद डॉ. बिमोल अकोइजाम भी सांसद के रूप में मिलने वाला वेतन नहीं लेते। हालांकि वे सांसद के तौर पर मिलने वाले अन्य भत्तों के बारे में अलग व्यवस्था रखते हैं।
घोषित संपत्ति: लगभग ₹97 लाख
राजनीतिक दल: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
पेशा: शिक्षाविद और लेखक
दिलचस्प बात यह है कि नवीन जिंदल और बिमोल अकोइजाम की आर्थिक पृष्ठभूमि में काफी अंतर है, लेकिन दोनों ने जनसेवा के लिए वेतन नहीं लेने का फैसला किया है।
लोकसभा में सांसदों की स्थिति
RTI के अनुसार:
लोकसभा की कुल सीटें: 543
वर्तमान में रिक्त सीटें: 2
वेतन लेने वाले सांसद: लगभग 481
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि वर्तमान लोकसभा में केवल दो सांसद ही ऐसे हैं जो वेतन नहीं लेते।
सांसदों को कितना मिलता है वेतन?
भारत में सांसदों को संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम के तहत कई सुविधाएं मिलती हैं।मुख्य लाभ:
मासिक वेतन: लगभग ₹1 लाख
संसदीय क्षेत्र भत्ता: लगभग ₹70,000
कार्यालय व्यय भत्ता: लगभग ₹60,000
इसके अलावा यात्रा, आवास और अन्य सुविधाएं भी दी जाती हैं।
जनसेवा का अलग उदाहरण
आज के राजनीतिक माहौल में जब नेताओं के वेतन और सुविधाओं पर बहस होती रहती है, ऐसे में नवीन जिंदल और बिमोल अकोइजाम का वेतन न लेने का निर्णय चर्चा का विषय बन गया है।यह फैसला यह भी दर्शाता है कि अलग-अलग आर्थिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि के बावजूद कुछ जनप्रतिनिधि सार्वजनिक जीवन में अलग मिसाल पेश करना चाहते हैं।
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