जनता तो पूछेगी , भगवत कौशिक।तोशाम/भिवानी : आने वाली 3 मार्च को पड़ने वाला चंद्रग्रहण कोई साधारण खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि यह एक दुर्लभ ‘ब्लड मून’ के रूप में दिखाई देगा। तोशाम के दक्षिणमुखी संकटमोचन मेहंदीपुर बालाजी दरबार के महंत पंडित रामकिशन महाराज ने बताया कि लगभग एक सदी (100 साल) बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब रंगों के त्योहार होली के बीच आसमान में ग्रहण का साया होगा।इस विशेष संयोग के कारण धार्मिक और ज्योतिषीय गणनाओं में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं, जिसका सीधा असर आम जनजीवन और त्योहार मनाने के तरीके पर पड़ेगा।
क्यों कहा जा रहा है इसे ‘सदी का महासंयोग’?
पंडित रामकिशन महाराज के अनुसार, वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों दृष्टियों से यह घटना बेहद महत्वपूर्ण है।वैज्ञानिक दृष्टि: जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है, तो चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया (अम्ब्रा) से गुजरता है। इस दौरान चंद्रमा तांबे जैसा गहरा लाल दिखता है, जिसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।
धार्मिक संयोग: होली की अग्नि की रात के तुरंत बाद लालिमा लिए चंद्रमा का दिखना एक अद्भुत दृश्य होगा। ऐसा संयोग पिछले 100 वर्षों में नहीं देखा गया।
सूतक काल और समय: कब खेलें होली?ग्रहण के कारण इस बार होली की तारीखों में बदलाव हुआ है। पंडित जी ने स्पष्ट किया कि:
सूतक काल प्रारंभ: 3 मार्च, सुबह 06:20 बजे से।
ग्रहण का समय: दोपहर 03:19 बजे से शाम 06:47 बजे तक।
होली का निर्णय: सूतक और ग्रहण के प्रभाव के कारण इस साल रंगों की होली 3 मार्च के बजाय 4 मार्च को खेली जाएगी।
विशेष नोट: चूंकि यह ग्रहण भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल पूरी तरह मान्य होगा।
ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें? (जरूरी सावधानियां)
पंडित रामकिशन महाराज ने ग्रहण के दौरान नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए कुछ कड़े नियम बताए हैं:
गर्भवती महिलाएं: नुकीली चीजें जैसे कैंची, सुई या चाकू का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।
मंदिर के कपाट: ग्रहण के दौरान घर के मंदिर के कपाट बंद रखें और मूर्तियों को न छुएं।
खान-पान: ग्रहण काल में भोजन करने से बचें। यदि भोजन पहले से बना है, तो उसमें तुलसी के पत्ते डाल दें।
शुद्धिकरण: ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
वास्तु टिप्स: घर के मुख्य द्वार से पुराने जूते-चप्पल हटा दें, रुकी हुई घड़ियाँ ठीक कराएं और खंडित मूर्तियों को विसर्जित कर दें।
अंक ज्योतिष और प्रभाव
महंत जी ने बताया कि यह ग्रहण केवल खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि अंक ज्योतिष के अनुसार आपकी जन्मतिथि के आधार पर भावनात्मक उथल-पुथल भी ला सकता है। “ब्लड मून” को ज्योतिष में मानसिक तनाव का कारक माना जाता है, इसलिए इस दौरान मंत्र जप और संयम रखना श्रेयस्कर है।
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