जनता तो पूछेगी, संवाददाता।भोपाल : मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्य में महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर आंकड़े सामने आए हैं। गृह विभाग द्वारा सदन में प्रस्तुत लिखित जानकारी के अनुसार, पिछले छह वर्षों में प्रदेश भर से लगभग 2 लाख 70 हजार महिलाएं और लड़कियां लापता दर्ज की गई हैं। इनमें से करीब 50 हजार मामलों में अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।सदन में दी गई जानकारी के अनुसार, शेष मामलों में पुलिस ने संबंधित महिलाओं और बच्चियों को खोज निकालने या उनके बारे में जानकारी जुटाने का दावा किया है। हालांकि बड़ी संख्या में अब भी लंबित मामलों ने महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
विपक्ष ने घेरा, सरकार ने दी सफाई
विधानसभा में विपक्षी सदस्यों ने इन आंकड़ों को बेहद गंभीर बताते हुए सरकार से जवाब तलब किया। उनका कहना था कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चियों का लापता होना राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है।इस पर सरकार की ओर से कहा गया कि लापता व्यक्तियों की तलाश के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। मानव तस्करी और महिला अपराधों पर निगरानी बढ़ाई गई है तथा अन्य राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर मामलों की जांच की जा रही है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी गुमशुदगी के मामले आपराधिक नहीं होते, कई मामलों में पारिवारिक विवाद या स्वेच्छा से घर छोड़ने जैसी परिस्थितियां भी सामने आती हैं।
सामाजिक संगठनों की चिंता
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने इन आंकड़ों को चिंताजनक बताया है। उनका कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में जागरूकता की कमी तथा समय पर कार्रवाई न होने से कई मामलों में देरी होती है। उन्होंने गुमशुदगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई और बेहतर ट्रैकिंग प्रणाली की मांग की है।
व्यापक चुनौती
प्रदेश में सामने आए ये आंकड़े महिला और बालिका सुरक्षा के क्षेत्र में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी निगरानी, सामुदायिक जागरूकता और पुलिस तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि लंबित मामलों का जल्द समाधान हो सके।राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया है कि सभी लंबित मामलों की समीक्षा कर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।
