जनता तो पूछेगी, भगवत कौशिक।भिवानी : केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, कर्मचारी संगठनों के आह्वान पर लेबर कोड रद्द करने, न्यूनतम वेतन 26000 रुपए लागू करने, आंगनबाड़ी, आशा, मिड डे मील, वन मजदूरों, ग्रामीण चौकीदार व सफाई कर्मियों समेत सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, उेच लागू करने, बिजली बिल, बीज विधेयक, वी बी जी राम जी को रद्द करने, पुरानी पेंशन की बहाली, सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाने समेत अन्य मांगो को लेकर हजारों मजदूर, कर्मचारियों, परियोजना कर्मियों ने शहर में पुराना बस अड्डा तक रोष प्रदर्शन किया। हड़ताल करके बिजली बोर्ड, शिक्षा बोर्ड, नगरपालिका, रोडवेज, व अन्य सरकारी विभागों, भवन निर्माण, मनरेगा, आंगनबाडी, आशा, मिड डे मील कर्मीयों, वन मजदूरों, ग्रामीण चौकीदारों सफाई कर्मीयों ने हड़ताल करके नेहरू पार्क भिवानी में इकट्ठा हुए व रोष सभा की। रोष प्रदर्शन व सभा की सयुक्त अध्यक्षता सीटू से सुशीला सरोहा, सर्व कर्मचारी संघ से सुमेर आर्य, इंटक से कृष्ण बड़सी, एआईयूटीयूसी से राजकुमार बसिया, राष्ट्रीय कामगार संघ से मंजू भानगढ़ ने व संचालन सीटू नेता सदीक डाढ़म व सर्व कर्मचारी संघ नेता धर्मवीर भाटी ने किया।
देशव्यापी हड़ताल की रोष सभा व प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मजदूर, कर्मचारी व किसान नेताओं ने कहा कि देश व प्रदेश की भाजपा सरकार मजदूर, कर्मचारी व किसान विरोधी नीतियों को अपना रही है। वर्तमान सरकार निजीकरण उदारीकरण की नीतियों पर तेजी से आगे बढ़ रही है जिसके चलते जनता के हक के तमाम कानूनों को समाप्त किया जा रहा है। भाजपा सरकार ने 29 श्रम कानूनों को समाप्त करके चार लेबर कोड लागू कर दिए है। मजदूरों को कॉरपोरेट का गुलाम बनाने का षडयंत्र रचा जा रहा है। मजदूर वर्ग के ऐतिहासिक आंदोलनों की बदौलत बने 8 घंटे के कानून को पलट दिया गया है जिसके स्थान पर हरियाणा सरकार 10 घंटे का कानून पास कर चुकी है। यूनियन बनाने, हड़ताल करने जैसे मौलिक अधिकारों को भी खत्म किया जा रहा है। 45 वे श्रम सम्मेलन की सिफारिश के मुताबिक समान काम समान वेतन, स्थाई काम स्थाई रोजगार, न्यूनतम वेतन लागू किए जाने समेत सभी सिफारिशों को भूला दिया गया है। 2005 में बने मनरेगा के कानून के स्थान पर वी बी जी राम योजना को लागू किया जा रहा है। मोदी सरकार बिजली बिल, बीज विधेयक, शांति विधेयक, सपब के निजीकरण समेत अन्य सार्वजनिक क्षेत्र को कॉरपोरेट के हवाले किया जा रहा है। देश व प्रदेश की सरकार भवन निर्माण मजदूरों के बोर्ड को भ्रष्टाचार के बहाने खत्म कर रही है। सालों से काम कर रही आंगनबाड़ी, आशा कर्मी, मिड डे मील, वन मजदूरों, ग्रामीण चौकीदार व सफाई कर्मियों, अलग अलग विभागों में काम कर रहे कच्चे कर्मचारियों को मिनिमम वेतन देकर व कच्चा रखकर भारी शोषण किया जा रहा है। पुरानी पेंशन के स्थान पर न्यू पेंशन स्कीम को लागू किया जा रहा है। सरकारी विभागों का निजीकरण किया जा रहा है। चिरांग योजना के बहाने स्कूलों को बंद किया जा रहा है। हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद सफाई कर्मियों, वन मजदूरों, परियोजना कर्मियों, चौकीदारों व कच्चे कर्मचारियों को पक्का न करके भारी शोषण किया जा रहा है। शिक्षा बोर्ड, बिजली व अन्य महकमों को बहाने बनाकर खत्म किया जा रहा है। जिसके खिलाफ मजदूरों व कर्मचारियों में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।
आज के रोष प्रदर्शन को सीटू नेता कामरेड अनिल कुमार, , सर्व कर्मचारी संघ से अशोक गोयत, इंटक से रामौतार खोरड़ा, एटक से ईश्वर शर्मा, एआईयूटीयूसी से धर्मवीर सिंह, राष्ट्रीय कामगार संघ से सुरेश गुजरानी, रिटायर्ड कर्मचारी संघ से मास्टर वजीर सिंह, किसान सभा व माकपा नेता कामरेड ओमप्रकाश,आशा नेता सुशीला, आंगनबाड़ी नेता रीटा चांग, एआईकेकेएमएस से रोहतास सैनी, सयुक्त किसान मोर्चा कमल प्रधान, स्वराज किसान मोर्चा से राज सिंह, नगरपालिका कर्मचारी नेता पुरुषोत्तम दानव, शिक्षा बोर्ड कर्मचारी नेता सत्यवीर स्वामी, जनवादी महिला समिति नेता बिमला घणघस, सुपरवाइजर एसोसिएश से कुसुम, टेक्सटाइल यूनियन(इजउ) नेता सोमबीर जांगड़ा, मजदूर सभा(इजउ) से रणसिंह यादव, अध्यापक संघ नेता अजीत राठी आदि ने संबोधित किया। देशव्यापी हड़ताल को कांग्रेस से प्रदीप गुलिया, अनिरुद्ध चौधरी, एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) नेता रामफल ने समर्थन देते हुए अपनी बात रखी। अध्यापक संघ नेता अजीत राठी, पब्लिक हैल्थ नेता सुरजभान जटासरा, पटवार एंव कानूनगों ऐसोसियेशन सैलेन्द्र, वन कर्मचारी नेता हंसराज, बैंक इम्पलाईज ऐसोसियेशन नेता सत्यशील कौशिक, मिड डे मील नेता सुदेश, वन मजदूर नेता संजय आसलवास, भवन निर्माण नेता धर्मबीर बामला आदि ने भी अपना सर्मथन दिया।
