बापोंडा की बाबा पंचवीर गौशाला में गूंजी सांग की स्वर लहरियां – चौथे दिन राजा विक्रमजीत के न्याय और साहस की गाथा ने मोहा मन

जनता तो पूछेगी , संवाददाता।भिवानी : गांव बापोंडा स्थित बाबा पंचवीर गौशाला में इन दिनों भक्ति, सेवा और संस्कृति की त्रिवेणी बह रही है। हरियाणा कला परिषद के सहयोग से गो-सेवार्थ आयोजित किए जा रहे सात दिवसीय सांग महोत्सव के चौथे दिन शुक्रवार को दर्शकों को पौराणिक और ऐतिहासिक वीरता के दर्शन हुए। सुप्रसिद्ध सांगी वेद प्रकाश अत्री और उनके दल ने राजा वीर विक्रमाजीत के सांग का मंचन कर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंचन के दौरान सांगी वेद प्रकाश अत्री ने बताया कि उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ना केवल एक प्रतापी शासक थे, बल्कि अत्यंत धर्मधारी और न्यायप्रिय भी थे। कलाकारों ने बताया कि देवराज इंद्र और मानसरोवर के हंसों के बीच हुई अनबन के कारण, इंद्र ने क्रोधवश हंसों को 12 वर्ष तक मृत्युलोक (पृथ्वी) में भटकने का श्राप दे दिया। ये हंस राजा विक्रमादित्य की शरण में आए और 12 वर्षों तक वहीं रहे। जब वनवास पूरा हुआ, तो हंसों ने राजा की दानवीरता और न्याय की तुलना देवताओं से की। एक मृत्युलोक के राजा की इतनी प्रशंसा सुनकर इंद्र ने एक हंसनी को कैद कर लिया और चुनौती दी कि यदि विक्रमादित्य वास्तव में इतने महान हैं, तो इसे छुड़ाकर दिखाएं। राजा विक्रमादित्य ने कठिन बाधाओं और इंद्र से संभावित युद्ध की परवाह न करते हुए अपने वचन को सर्वोपरि रखा। अंतत: उन्होंने इंद्र की कैद से हंसनी को मुक्त कराया।

सांग के माध्यम से कलाकारों ने यह संदेश दिया कि सच्चा राजा वही है जो कमजोर और शरणागत की रक्षा के लिए सर्वस्व दांव पर लगा दे। गौशाला समिति ने बताया कि इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य लुप्त होती सांग कला को पुनर्जीवित करना और गो-शाला हेतु सहयोग जुटाना है। सांग के बीच-बीच में गाये गए भजनों और लोक गीतों पर ग्रामीण झूमते नजर आए। उन्होंने बताया कि इस महोत्सव की रौनक बढ़ाने और कलाकारों का उत्साहवर्धन करने के लिए 15 फरवरी को हरियाणा कला परिषद (रोहतक मंडल) के क्षेत्रीय निदेशक और विख्यात कलाकार गजेंद्र फोगट जी मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। उनके आगमन को लेकर ग्रामीणों और कला प्रेमियों में भारी उत्साह है।

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